“When troubles come, they come in battalions”. We all have experienced this some time in our lives. Here’s a Hindi poem, expressing my feelings, as a humble request to the challenges in life.
मुसीबतों से दरख्वास्त है
जरा संभल के पधारे
पूरी जिंदगी पड़ी है
जरा फुरसत से आए
एक को गले लगाने
थोड़ा व्यक्त तो दे दो
ताकि दूसरे के साथ
कोई अन्याय न हो
कहते है मुश्किलों का सामना
धैर्य जुटाकर करना
पर धैर्य कमबख्त नाकाम
पिछले से अब तक नहीं आबाद
मुश्किलों को कहाँ इतनी अक्ल
आदमी है थका, मुरझा गयी है शक्ल
एक के बाद आना ही है उनका धर्म
और इन्हे स्वीकारना ही है हमारा कर्म
इन्हे स्वीकारने मे छीपा
जिंदगी का मर्म
वरना क्यों लोग झेलते इन्हे,
सुलझाते जीवन का अर्थ?