पतझड़ का क्यों करू इंतेजार
जो लंबी सर्दी की याद दिलाए बारबार

सुंदर मोहक हरे पीले लाल पर्न
लगता यू जैसे धरती है बनी स्वर्ग
एक मन चाहे ये नज़ारा कभी न हो खत्म
पर दूजा राह देखे की कब पूरा पेड़ हो रिक्त

यू तो खाली पेड़ मे क्या है देखने लायक
कईयों को ये रूप शायद लगे भयानक
पर मेरा मन जाने क्यों राह देखू मै इसकी
ताकि देख सकु पत्तों के पीछे छिपे मेरे प्यारे पंछी
